Aukat Shayari

watch_later Friday, 1 November 2019

बिगड़ रहा हो वक़्त तो, न कोई हालात पूछता है,
टकरा जाता है कोई अनजाने में, तो सबसे पहले औकात पूछता है।

दिखा दी है औकात, 
जिन्हें हम अपना मानते थे,
वो ही निकले बेवफा, 
जिन्हें सबसे करीब मानते थे।

बात तो औकात की होती है जिंदगी में अक्सर
कोई बता जाता है, कोई दिखा जाता है।

बहुत कोशिशें की थीं, उसने खुद को बदलने की,
मौका मिलने पर जो आज, अपनी औकात दिखा गया।

सिलसिला न रुका खुशियों का
कि वो हमारी खुशियों की सौगात थी,
कैसे आ जाता कोई गम जिंदगी में
उसके आगे ग़मों की क्या औकात थी।

दर्द दिल में और मन में
जज़्बात लेकर घूमते हैं,
इन्सान हैं हम इंसानियत की
औकात लेकर घूमते हैं।

बदल गयी है जिंदगी किसी की
किसी के दिन और किसी की रात बदल गयी है,
अब वो लहजा कहाँ है उसके अल्फाजों में
देखो आज किसी की औकात बदल गयी है।

औकात का पैमाना भी
आजकल पैसा हो गया है यारों,
बिक चुका है ये भी
कुछ रईसदारों के हाथ।

बुरे वक़्त के साथ
जो मैंने अपनी मुलाकात देख ली,
किसी की सच्चाई और
किसी की औकात देख ली।

सफलता की फसल सींचने को
मेहनत की बरसात बनानी पड़ती है,
झुक के सलाम करती है ये दुनिया
पहले बस औकात बनानी पड़ती है।

जिन्हें हमने अपना समझा
वो आज गैरों में हैं,
हमें दिखाते थे जो औकात
वो आज किसी और के पैरों में हैं।

खुद के बारे में वो बताते हैं जिनसे लोग अनजान है
पता लग ही जाता है  हर इन्सान की औकात का,
कारनामे तुम्हारे खुद तुम्हारी पहचान हैं।

घूम फिर कर हर शख्स
उसी बात पर आ जाता है,
मतलब निकल जाए तो अपनी
औकात दिखा जाता है।

कभी-कभी जमीन पर
गिरना भी जरूरी है दोस्तों,
ऊंचीं उड़ाने अक्सर इन्सान को
उसकी औकात भुला देती है।



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