तेरे वादे को कभी झूट नहीं समझूँगा कल की रात भी दरवाज़ा खुला रखूँगा रातों में खूब बातें होतीं हैं खुद से, कौन कहता है अक...

कम से कम अपनी जुल्फे तो बाँध लिया करो। कमबख्त. बेवजह मौसम बदल दिया करते हैं।। जो आना चाहो हज़ारों रास्ते न आना चाहो तो हज़ारों बहाने। मिज़ाज-...

इक वक़्त था कि दिल को सुकूँ की तलाश थी, और अब ये आरज़ू है कि दर्द-ए-निहाँ रहे.. हर बार उसी से गुफ़्तग...

इक वक़्त था कि दिल को सुकूँ की तलाश थी, और अब ये आरज़ू है कि दर्द-ए-निहाँ रहे.. हर बार उसी से गुफ़्तग...

तुमको देखा तो ये खयाल आया जिंदगी धूप, तुम घना साया आया ही था ख्याल कि आंखें छलक पड़ी, ...