कम से कम अपनी जुल्फे तो बाँध लिया करो।
कमबख्त. बेवजह मौसम बदल दिया करते हैं।।
जो आना चाहो हज़ारों रास्ते
न आना चाहो तो हज़ारों बहाने।
मिज़ाज-ऐ-बरहम , मुश्किल रास्ता
बरसती बारिश और ख़राब मौसम।।
लुत्फ़ जो उस के इंतज़ार में है।
वो कहाँ मौसम-ए-बहार में है।।
तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे।
मैं शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे।।
क़ैसर-उल जाफ़री
यूँ ही शाख से पत्ते गिरा नहीं करते,
बिछड़ के लोग भी ज्यादा जिया नहीं करते।
जो आने वाले हैं मौसम उनका एहतराम करो,
जो दिन गुजर गए उनको गिना नहीं करते।।
आज है वो बहार का मौसम,
फूल तोड़ूँ तो हाथ जाम आए।।
मौसम को मौसम की बहारों ने लूटा,
हमे कश्ती ने नहीं किनारों ने लूटा।।
कुछ आपका अंदाज है कुछ मौसम रंगीन है,
तारीफ करूँ या चुप रहूँ, जुर्म दोनो संगीन है।।
मौसम गए सुकून गया ज़िन्दगी गई
दीवानगी की आग में क्या-क्या गया न पूछ।।
धुप सा रंग है और खुद है वो छाँवो जैसा
उसकी पायल में बरसात का मौसम छनके।।
क़तील शिफ़ाई
जाता हुआ मौसम लौटकर आया है,
काश वो भी कोशिश करके देखे?
मौसम भी है सुहाना, बारिश भी हो रही है,
बस एक कमी है तेरा मुझसे गले लग जाना।।
कुछ तो मौसम-ए-हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख्याल भी,
दिल को खुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी।।
बहुत ही सर्द है अब के दयार-ए-शौक़ का मौसम,
चलो गुज़रे दिनों की राख में चिंगारियाँ ढूँडें।।
प्रकाश फ़िक्री
मौसम की तरह बदलते हैं उस के वादे,
उस पर यह ज़िद की तुम मुझ पे एतबार करो।।
मौसम ने बनाया है निगाहों को शराबी,
जिस फूल को देखूं वोही पैमाना हुआ है।।
मौसम की मिसाल दूँ या तुम्हारी
कोई पूछ बैठा है बदलना किसको कहते हैं।।
तब्दीली जब आती है मौसम की अदाओं में,
किसी का यूँ बदल जाना बहुत ही याद आता है।।
आज मौसम कितना खुश गंवार हो गया
ख़त्म सभी का इंतज़ार हो गया।
बारिश की बूंदे गिरी इस तरह से
लगा जैसे आसमान को ज़मीन से प्यार हो गया।।
मौसम की पहली बारिश में तुम मिले इस तरह
जैसे धरती मिल गई हो आसमान से
जैसे बूँदों ने पहली बार किया हो ।
आलिंगन माटी के सीने से और उसी माटी की सौंधी
खुशबू की तरह फैल रहा है हर तरफ प्यार तेरा।।
पतझड़ में सिर्फ पत्ते गिरते हैं।
नज़रों से गिरने का कोई मौसम नहीं होता।।
दिल की बाते कौन जाने,
मेरे हालात को कौन जाने,
बस बारिश का मौसम है।
पर दिल की ख्वाहिश कौन जाने,
मेरी प्यास का एहसास कौन जाने?
तेरे तसव्वुर की धूप ओढ़े खड़ा हूँ छत पर।
मिरे लिए सर्दियों का मौसम ज़रा अलग है।।
साबिर
रिमझिम बरस पड़े हो तुम तो फुहार बन के
आया है अब तो मौसम कैसा खुमार बन के
मेरे दिल में यूँहीं रहना तुम प्यार प्यार बन के।।
कुछ तो तेरे मौसम ही मुझे रास कम आये।
और कुछ तेरी मिटटी में बगावत भी बहुत थी।।
उस को भला कोई कैसे गुलाब दे।
जिसके आने से बारिश का मौसम और गुलाबी हो जाता है।।
इतनी बारिश और रोमांटिक मौसम ना कर ओ राम जी,
जरुरी नहीं की सब की सैटिंग हो।।
शहर देखकर ही अब हवा चला करती है।
अब इंसान की तरह होशियार मौसम होते हैं।।
छु कर निकलती है जो हवाएँ तेरे चेहरे को,
सारे शहर का मौसम गुलाबी हो जाता है।।
आज कुछ और नहीं बस इतना सुनो,
मौसम हसीन है लेकिन तुम जैसा नहीं।।
अपने किरदार को मौसम से बचाए रखना।
लौट कर फूलों में वापस नहीं आती खुशबू।।
ये बारिश का मौसम, और तुम्हारी याद।
चलो फिर मिलते है ,एक कप चाय के साथ।।
बरसता भीगता मौसम धुआं धुआं होगा।
पिघलती शम्मों पे दिल का मेरे गुमां होगा।।
जब इंसान की फितरत बदल रही हो तो
ये जरुरी नहीं की इंसान बदल गया,
हो सकता है बाहर का मौसम बदल रहा हो।।
कब तलक दिल में जगह दोगे हवा के ख़ौफ़ को।
बादबाँ खोलो कि मौसम का इशारा हो चुका।।
शहज़ाद अहमद
हमें इस सर्द मौसम में तेरी यादें सताती हैं।
तुम्हें एहसास होने तक दिसंबर बीत जायेगा।।
प्यार में एक ही मौसम है बहारों का मौसम।
लोग मौसम की तरह फिर कैसे बदल जाते हैं।।
फ़राज़
जब से तेरे ख़याल का, मौसम हुआ है दोस्त
दुनिया की धूप-छाँव से आगे निकल गये।।
मंजर भी बेनूर थे
और फिजायें भी बेरंग थी,
तुम्हारी याद आयी और
मौसम सुहाना हो गया।।
जिसके आने से मेरे ज़ख्म भरा करते थे।
अब वो मौसम मेरे ज़ख्मो को हरा करते हैं।।
वाह मौसम तेरी वफा पे आज दिल खुश हो गया,,
याद-ए-यार मुझे आयी और बरस तू पड़ा।।
प्यार करने का मौसम नहीं आता हैं,
पर जब तुम सामने आते हो, तो हर
मौसम मजेदार बन जाता हैं।।
सर्दी में दिन सर्द मिला।
हर मौसम बेदर्द मिला।।
मोहम्मद अल्वी
दर्द दर्द में कोई मौसम प्यारा नही होता,
दिल हो प्यासा तो पानी से गुजारा नही होता,
कोई देखे तो हमारी बेबसी,
हम सभी के हो जाते हैं ,
पर कोई हमारा नही होता।।
कुछ दर्द कुछ नमी कुछ बातें जुदाई की।
गुजर गया ख्यालों से तेरी याद का मौसम।।
एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरबाई भी।
ऐसा तो कम ही होता है वो भी हो तन्हाई भी।।
मौसम-ए-गुल में तो आ जाती है काँटों पे बहार।
बात तो जब है ख़िजाँ में गुल-ए-तर पैदा कर।।
फ़ना निज़ामी
कोई मौसम हो दिल-गुलिस्ताँ में।
आरज़ू के गुलाब ताज़ा हैं।।
किसने जाना है बदलते हुए मौसम का मिज़ाज।
उसको चाहो तो समझ पाओगे फ़ितरत उसकी।।
मौसम-ए-बहार है अम्बरीं ख़ुमार है।
किस का इंतिज़ार है गेसुओं को खोलिए।।
अदम
सर्दी के मौसम का मजा अलग सा है,
रात मे रजाई का मजा अलग सा है।
धुंध ने आकर छिपा लिया सितारों को,
आपकी जुदाई का ऐहसास अब अलग सा है।।
उदास ज़िन्दगी, उदास वक्त, उदास मौसम।
कितनी चीज़ों पे इल्ज़ाम लग जाता है तेरे बात न करने से।।
साहिल. रेत. समंदर लहरें बस्ती .जंगल सहरा दरिया
खुशबू मौसम फूल दरीचे बादल सूरज चाँद सितारे
आज ये सब कुछ नाम तुम्हारे।।
मौसम ए इश्क़ है ये जरा खुश्क हो जायेगा
ना उलझिये हमसे जनाब वर्ना इश्क हो जायेगा।।
अच्छा सुनो तुम अपना जरा ध्यान रखना,
अभी मौसम बीमारी का भी हैं और इश्क का भी।।
शायद कायनात भी है गुलाम तुम्हारी।
तभी तो हर बदलता मौसम लिए आता है खुशबू तुम्हारी।।
टपक पड़ते हैँ आँसू जब किसी की याद आती है।
ये वो बरसात है जिसका कोई मौसम नहीँ होता।।
जुदाई की रुतों में सूरतें धुंधलाने लगती हैं,
सो ऐसे मौसमों में आइना देखा नहीं करते।।
हसन अब्बास रज़ा
ये बारिश ये हसीन मौसम और ये मदमस्त हवाये,
लगता है आज मोहब्बत प्यार की बाहो में हैं।।
शहर में बिखरी हुई हैं, ज़ख्म-ए-दिल की खुशबुएँ,
ऐसा लगता है के दीवानों का मौसम आ गया।।
बेवफाई का मौसम भी अब यहाँ आने लगा है।
वो फिर से किसी और को देख कर मुस्कुराने लगा है।।
वही पर्दा, वही खिड़की, वही मौसम, वही आहट।
शरारत है, शरारत है, शरारत है, शरारत है।
सर्द मौसम में छनी हुयी धुप सी लगते हो।
कोई बादल हरे मौसम का फ़िर ऐलान करता है।।
जो अपनी औलाद से बढ़ कर,समझे पौधों-पेड़ों को।
आने वाले मौसम में इस बाग़ को ऐसा माली दे।।
उदास छोड़ गया वो हर एक मौसम को।
ग़ुलाब खिलते थे कल जिसके मुस्कुराने से।।
सर्द मौसम में बहुत याद आते हैं।
धुँध में लिपटे हुए वादे तेरे।।
इससे पहले कहीं रूठ न जाएँ मौसम अपने।
धड़कते हुए अरमानों एक सुरमई शाम दे दें।।
मौसम अच्छा हो गया है,
लगता है मेरी जिंदगी में
तुम आने वाले हो।।
काश तुझे सर्दी के मौसम मे लगे मोहब्बत की ठंड।
और तु तड़प के मांगे मुझे कंबल की तरह।।
कभी सावन के शोर ने मदहोश किया था मौसम।
आज पतझड़ में हर दरख़्त खामोश खड़ा है।।
मौसम इस कदर खुमारी मे है।
मेरा शहर भी शिमला होने की तैयारी में है।।
बालकनी से बाहर आकर कर देखो ये जानेजाना।
मौसम तुम से मेरे दिल की बात कहने आया है।।
अभी तो खुश्क़ है मौसम, बारिश हो तो सोचेंगे।
हमें अपने अरमानों को,किस मिट्टी में बोना है।।
किसके नक्श-ए-पा पड़े पलकें वजू करने लगीं,
मौसमो का रंग बदला रुत सुहानी हो गयी।।
रंग पैराहन का खुश्बू जुल्फ लहराने का नाम।
मौसम-ए-गुल है तुम्हारे बाम पर आने का नाम।।
फ़ैज़
अपनी सी लगती है हर नमी अब तो।
आँखों ने खुश्क मौसम कभी देखे ही नहीं।।
बदला जो रंग उसने हैरत हुयी मुझे।
मौसम को भी मात दे गयी फ़ितरत जनाब की।।
हमें क्या पता था, ये मौसम यूँ रो पड़ेगा।
हमने तो आसमां को बस अपनी दास्ताँ सुनाई है।।
क्यों आग सी लगा के गुमसुम है चाँदनी,
सोने भी नहीं देता मौसम का ये इशारा।।
वाह मौसम आज तेरी अदा पर
दिल को प्यार आ गया, वो पास आई,
और तू बारिश बनकर बरस गया।।
ये बारिश ये हसीन मौसम और ये मदमस्त हवाये।
लगता है आज मोहब्बत प्यार की बाहो में हैं।।
आमद से पहले तेरी सजाते कहाँ से फूल।
मौसम बहार का तो तेरे साथ आया है।।
दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था
इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था।।
क़तील शिफ़ाई
उसे छुआ तो दिसम्बर में प्यास लगने लगी।
कि उसके ज़िस्म का मौसम तो जून जैसा है।।
बलखाने दे अपनी जुल्फों को हवाओं में।
जूड़े बांधकर तू मौसम को परेशां न कर।।
कहानी बस इतनी सी थी तेरी मेरी मोहब्बत की।
मौसम की तरह तुम बदल गए
और फसल की तरह हम बरबाद हो गए।।
ये दिसम्बर तो बातोँ का मौसम था।
दुआ करो कि जनवरी बांहोँ का मौसम हो।।
खुद भी रोता है, मुझे भी रुला के जाता है।
ये बारिश का मौसम, उसकी याद दिला के जाता है।।
धूप भी खुल के कुछ नहीं कहती ,
रात ढलती नहीं थम जाती है।
सर्द मौसम की एक दिक्कत है ,
याद तक जम के बैठ जाती है।।
क्यूँ किसी की यादों को सोच कर रोया जाए,
क्यूँ किसी के ख्यालों में यूँ खोया जाए।
बाहर मौसम बहुत ख़राब हैं,
क्यूँ न रजाई तानकर सोया जाए।।
लो बदल गया मौसम।
हूबहू तुम्हारी तरह।।
हम कि रूठी हुई रुत को भी मना लेते थे।
हम ने देखा ही न था मौसम-ए-हिज्राँ जानाँ।।
इनपे कभी मौसम का असर क्यों नहीं होता।
रद्द क्यों तेरी यादों की उड़ाने नहीं होती।।
जब जब आता है यह बरसात का मौसम,
तेरी याद होती है साथ हरदम।
इस मौसम में नहीं करेंगे याद तुझे यह सोचा है हमने,
पर फिर सोचा की बारिश को कैसे रोक पाएंगे हम।।
कहीं फिसल ना जाओ ज़रा संभल के रहना।
मौसम बारिश का भी है और मुहब्बत का भी।।
ये सुहाना मौसम, ये हल्की हवायें. फरवरी आ रही हैं।
बोलो, पट रहे हो तुम या हम किसी और को पटाये।।
सर्द फ़िजा.खुशनुमा मौसम और ओस की हल्की बूँदे।
खामखाँ बढ़ा दिया बेचैनियों को जनवरी की लहर ने।।
बरसता, भीगता मौसम है कमज़ोरी मेरी लेकिन,
मैं ये रिमझिम, घटा, बादल तुम्हारे नाम करता हूँ।।