तुमको देखा तो ये खयाल आया
जिंदगी धूप, तुम घना साया
आया ही था ख्याल कि
आंखें छलक पड़ी,
मेरे अश्क आपके यादों के
कितने करीब है.
रात को सोते हुए
एक बेवज़ह सा ख़्याल आया,
सुबह न जाग पाऊँ तो
क्या उसे ख़बर मिलेगी कभी.
ख्याल आते ही उनका
ख़ुशनुमा हो जाती है,
फ़िज़ा हर लम्हा उनकी उन्हीं यादों का
ओढे़ लिबास रहता है.
दिल जो अजब शहर था ख्यालों का,
लूटा हुआ है हुस्न वालों का.
जाने क्यों आती है याद तुम्हारी,
चुरा ले जाती है आँखों से नींद हमारी.
अब यही ख्याल रहता है सुबह शाम,
कब होगी तुमसे मुलाकात हमारी.
मिलके भी जो ना मिले,
जिन्दगी का वो ख्याल हो तुम,
ना सुलझेगा जो कभी,
ऐसा पेचीदा कोई सवाल हो तुम.
जीने की तमन्ना हो ,
तुम मेरी ज़रूरत हो,
मेरे ख़्याल से ,
तुम बड़ी खुबसूरत हो.
ख्यालों में रात को
तेरी तस्वीर बना बैठा,
इतनी अच्छी लगी की
सीने से लगा बैठा.
मैं पूरे दिन भर ना जाने
कितने चेहरो से रूबरू होता हूँ ,
पर पता नहीं रात को ख्याल,
सिर्फ तुमहारा ही क्युँ आता हैं.
जब भी ख्याल किया तो ख्याल तेरा आया
जब भी आँखें बंद की तो ख्वाब तेरा आया,
सोचा याद कर लू इस जहाँ को
मगर जब भी होंठ खोले तो नाम तेरा आया.
एक तेरा ख़याल ही तो है मेरे पास.!
वरना कौन अकेले में बैठकर मुस्कुराता है?
तमाम ख़्याल तो उन्हीं के हैं
उनके सिवा मेरे दिल में कोई ख़्याल नहीं.
तुम सनम वो ख्याल हो जिसे मैं
हर सुबह देखना पसंद करता हूँ.
तेरी आशिकी इस कदर चढ़ीँ मुझ पर,
अब तो खुद का भी ख्याल नही रहता.
किसी को देखकर जीने की
आदत अच्छी तो नहीं,
मगर सुकून के लिए
ये ख्याल बुरा तो नहीं.
काश उनको कभी
फुर्सत में ये ख्याल आए,
कि कोई याद करता है, उन्हें
जिन्दगी समझ कर.
जब भी किसी को चाहने का सवाल आया,
दिल में बस तेरा ही ख्याल आया.
मैं तबाह हूँ तेरे प्यार में
तुझे दूसरों का ख्याल है,
कुछ तो मेरे मसले पर गौर कर
मेरी जिन्दगी का सवाल है.
बेखयाली में भी तेरा ख्याल आये,
क्यों जुदाई दे गया तू ये सवाल आये,
थोड़ा सा मै खफा हो गया अपने आप से,
थोड़ा सा तुझ पे भी बेवजह ही मलाल आये.
एक ख्याल ही तो हूँ मैं ,
याद रह जाऊँ तो याद रखना,
वरना सौ बहाने मिलेंगे
भूल जाना मुझे.
क्यू जीने नहीं देता है
तेरा ख्याल सर्द रातो मे,
ना जाने कितनी उलझने है
इश्क भरी आँखो मे.
जब तेरे ख्याल से मुलाकात हो जाती है,
तूझे याद करते करते रात हो जाती है,
रूकता नहीं है सिलसिला इरादों का मेरे,
जब ख्वाबों से रूबरू बात़ हो जाती है.
कदर कर लो उनकी जो तुम से
बिना मतलब की चाहत करते है
दुनिया में ख्याल रखने वाले कम
और तकलीफ देने वाले ज्यादा होते है.
एक दिन यादों में सिमटे,
ख़्याल मेरा तुझे भी आएगा,
हो सकता है मुझे खो देने का मलाल,
उस दिन तुझे भी रुलाएगा.
जब कोई ख्याल दिल से टकराता है,
दिल न चाह कर भी, खामोश रह जाता है.
कोई सब कुछ कहकर, प्यार जताता है,
कोई कुछ न कहकर भी, सब बोल जाता है.
सोए हुए थे सुकून से
अचानक तड़प उठे,
यूँ आकर तेरे ख्याल ने
अच्छा नहीं किया.
मेरा ख्याल तुझको भला आये भी तो क्यों ?
में तो तेरे ख्याल से आगे की चीज हूँ.
ख्याल-ए-इश्क़ बस
आपका ही आता है,
ना जाने आपसे हमारा,
कौन से जन्म का नाता है?
अगर बात ख्याल की करे तो,
बस इतना कहेगे,
तुम से जुड़ा हो तो हसीन
और तुम्हारा हो तो बेहतरीन.
छू गया जब कभी ख्याल तेरा,
दिल मेरा देर तक धड़कता रहा,
कल तेरा ज़िक्र छिड़ गया घर में,
और घर देर तक महकता रहा.
वो शख्स रहता है हर वक्त
मेरे खयालों में इस तरह,
कि अब किसी और के ख्वाब
देखने की जरुरत नहीं मुझे.
अभी अभी भूले भी ना थे तुम्हें,
ख़याल बन के फ़िर, तुम आ गए,
साँसों की सरजमीं पर
बरसात ला गए,
एक झपकी में तेरे
सौ ख़्वाब आ गए.
दिल्लगी हद से न गुज़रे,
ये ख्याल रखियेगा,
जान पे बन आती है मोहब्बत में ,
ये ख्याल रखियेगा.
ख्याल में आता है जब भी उसका चेहरा,
तो लबों पे अक्सर फरियाद आती है,
भूल जाता हूँ सारे ग़म और सितम उसके,
जब ही उसकी थोड़ी सी मोहब्बत याद आती है.
वो कब का भूल चुका होगा
हमारी वफ़ा का किस्सा,
बिछड़ के किसी को
किसी का ख्याल कब रहता है.
अपने महबूब को
गजल के रूप में सवारूँ कैसे?
वो मेरे ख्यालों से
बढ़ कर खूबसूरत है.
तेरे बगैर जीने का ख्याल एक क़यामत है,
और तेरा दीदार भी क़यामत से कम नहीं.
तुम्हें सोच कर एक ख़्याल आया,
तुम ख्यालो मे कितने अच्छे लगते हो.
ज़माने भर के दिलों में ख़याल मौत का है,
कोई बताए कि क्या हाल-चाल मौत का है,
मैं जी रहा था तो इस ज़ीस्त से गिला था मुझे,
जो मर गया हूँ तो मुझको मलाल मौत का है.
उसका ख्याल तो छोड़ दे लेकिन
बस एक छोटी सी उलझन है,
सुना है दिल से धड़कन की जुदाई पर
मौत होती है.
क्या कहूँ, मेरा जो हाल है,
रात दिन, तुम्हारा ही खयाल है.
दिल बहल तो जायेगा इस ख़याल से,
हाल मिल गया तुम्हारा अपने हाल से,
रात ये क़रार की बेक़रार है,
तुम्हारा इन्तज़ार है.
काश कभी यूं हो ,
न हसरतें न जुनू हो,
तेरा ख्याल हो और तू हो,
दिल में बस सुकूँ हो.
सब कुछ मिला सुकून की दौलत नहीं मिली,
एक तुझको भूल जाने की मौहलत नहीं मिली,
करने को बहुत काम थे अपने लिए मगर,
हमको तेरे ख्याल से कभी फुर्सत नहीं मिली.
अकेले रहने की ख़ुद ही सज़ा क़ुबूल की है
ये हम ने इश्क़ किया है या कोई भूल की है,
ख़याल आया है अब रास्ता बदल लेंगे
अभी तलक तो बहुत ज़िंदगी फ़ुज़ूल की है.
अब तो इन आँखों से भी
जलन होती है मुझे,
खुली हो तो ख्याल तेरे
बंद हो तो ख़्वाब तेरे.
लिख दूं वो अल्फ़ाज़ हो तुम
सोच लूं वो ख्याल हो तुम,
काश कभी यूं हो
न हसरतें ,न जुनू हो,
तेरा ख्याल हो और तू हो,
दिल में बस सुकूँ हो.
तुम सोचो और ख़्याल पूरा हम करेंगे
मोहब्बत में दो रंग और ज्यादा भरेंगे,
तुझे अपनी जिंदगी माना है ऐ सनम
आखरी सांस तक मोहब्बत बेपनाह करेंगे.
जिसे याद कर लेने से
होंठों को हँसी छू जाये,
एक ऐसा ही खूबसूरत
मेरे दिल का खयाल हो तुम.
ऐसा नहीं कि शख्स
अच्छा नहीं था वो,
जैसा मेरे ख्याल में था
बस वैसा नहीं था.
मेरी ज़िन्दगी का सबसे
ख़ूबसूरत ख़्याल हो तुम,
इश्क़ और इबादत दोनो में
बेमिसाल हो तुम.
ख्वाब, ख्याल, मोहब्बत,
हक़ीक़त, गम और तन्हाई
ज़रा सी उम्र मेरी,
किस-किस के साथ गुज़र गयी.
मेरी मोहब्बत सच्ची है
तुम मुझे हर हाल में मिल जाओ
लगे हों लाख पहरे तो क्या
तुम मुझे ख्याल में मिल जाओ.
रूठने मनाने के
सिलसिलों में रखना ख्याल,
कहीं मोहब्बत
दम न तोड दे.
अभी तो दिल कर रहा है
कि बस सो जाऊं,
तेरे ख्यालों के घने जंगल में
खो जाऊँ.
मेरे ख्याल से अब हम,
तेरे ख्याल में भी नहीं रहे.
एक ख्याल तुम,
उस ख्याल से बे हाल हम.
कुछ दर्द कुछ नमी कुछ बातें जुदाई की,
गुजर गया ख्यालों से तेरी याद का मौसम.
दूरी ने कर दिया है
तुझे और भी करीब,
तेरा ख्याल आ कर न जाये
तो क्या करूँ?
इश्क़ के ख़याल बहुत हैं,
इश्क़ के चर्चे बहुत हैं.
सोचते हैं हम भी कर ले इश्क़.
पर सुनते हैं इश्क़ में खर्चे बहुत हैं.
तेरे साथ गुजरा लम्हा जब भी याद आएगा,
इस जनम के बाद भी तेरा ख्याल लाएगा,
अगर बक्शी बार -बार ज़िन्दगी खुदा ने,
तुझसे दोस्ती करना ये दिल हर बार चाहेगा.
जब भी तुम्हें मेरा ख्याल आये,
तो बस तुम अपना ख्याल रखना.
सुबह ख़ूबसूरत है,
या तुम्हारा ख़याल,
जो भी है ख़ुदा क़सम,
बस है लाजवाब.
जीने की वजह हो आप,
प्यार के खयाल हो आप.
हम लापरवाह है, मगर फिर भी
हमें सबका ख़्याल रखना आता है,
दूर रहने वाले तुझसे
यही बस यही कहूँगा कि,
जब भी मेरा ख्याल आये तुम
अपना ख्याल रखना.
तेरा ख्याल तेरा ध्यान बन के आयेंगे
तेरी ज़मी पे आसमान बन के आयेंगे,
बड़ी मुश्किल से हमें लोग समझ पाएं हैं
अगली बार कुछ आसान बन के आयेंगे.
जो कदम कदम चलूं तुझे ही तय करूँ मै
सांसे बन के तुझे ओढ़ लूँ
तू ख्याल सा मिला है जिसको गिन सकूँ मै
आदतों में तुझे जोड़ लूँ.
सुनो हर सुबह ख्याल बन के,
चले आते हो,
आपको और कोई कांम
नहीं हैं क्या?
छोड़ दिया है हमने
लोगों के ख्याल में जीना,
हम लोगो से नही
बिहारी जी से इश्क़ करते हैं.
मायूस ना हो उसको तेरा ख्याल है,
सब कुछ पता है उसको तेरा जो हाल है,
तुझको गले लगाएगा मेरा यार संवारा,
मुझको यकीन है आएगा मेरा यार संवारा.
मुझे इश्क़ नहीं आता
मुझे ख्याल रखना आता है.
आशिकी मेरी यूँ बिखर जाये,
आप ही आप फिर नज़र आये,
प्यार करती हूँ आपको जितना,
आपको भी मेरा ख्याल आये.
आशिकी हैं तुझे से ऐसी की
मेरे हर ख्याल बस तू है,
मोहब्बत बयान करने लिए तो
बस यही काफी हैं.
की मेरी सूबह तेरे नाम से शुरू और
तेरे नाम से खतम होती हैं.
तुम्हारी याद मेरे ख्याल
से ब्याही हुई है
खुदा करे ये जोड़ी
हमेशा सलामत रहे.
तरह-तरह से भुलाया मगर
ये हाल हुआ.,
हर एक खयाल से पैदा
तेरा खयाल हुआ.
किसके ख्याल से रोशन है
ये दुनिया मेरी,
तुमको सोचूँ तो
मोहब्बत की महक आती है.
रोज आता है मेरे दिल को
तसल्ली देने,
ख्याल-ए-यार को
मेरा ख्याल कितना है.
मेरे ख़्याल-ए-इश्क़ में
बस इतना ही सुकूँ हैं,
कि, वो सिर्फ़ मेरी है,
औऱ मैं सिर्फ़ उसका.
इश्क का ख्याल
और ख्याल में है इश्क,
मत पूछ
किस हाल में है इश्क?
तेरा ख्याल, तेरा ही चेहरा,
तेरी ही सदा है,
इश्क कुछ और नही
बस तेरी ही अदा है.
तेरे ख्याल से ही एक रौनक
आ जाती है दिल में,
तुम रूबर आओगे तो
जाने क्या आलम होगा?
मत कर तु मुझसे मोहब्बत
हक़ है तुझको,
फिर भी उम्र भर तेरा
खयाल दिल से ना जाने दूंगा.
जब कोई ख्याल दिल से टकराता है,
दिल ना चाहकर भी, खामोश रह जाता है,
कोई सब कुछ कहकर प्यार जताता है,
कोई कुछ ना कहकर भी, सब बोल जाता है.
सवाल का जवाब
सवाल में ही मिला मुझे,
वो शख्स मेरा ख्याल था
ख्याल में ही मिला मुझे.
खयालों में उसके मैंने
बिता दी ज़िंदगी सारी,
इबादत कर नहीं पाया
खुदा नाराज़ मत होना.
इश्क हो या इबादत हो
अब कुछ समझ नहीं आता,
एक खुबसूरत ख्याल हो तुम
जो दिल से नहीं जाता.
उस ख़्याल पर ही मुझे
प्यार आ जाता है,
ज़िक्र जिसमें तेरा
इक बार आ जाता है.
शायद उम्र भर की जुदाई का
ख्याल आया था उसे,
वो मुझे पास
अपने बैठा के रोई.
तेरा ज़िक्र तेरी फिक्र
तेरा एहसास तेरा ख्याल,
तू खुदा नहीं फिर
हर जगह मौज़ूद क्यूँ है?
बेरुख़ी भी इतनी की
ख़ुद का ही ख़्याल नही,
वो हाल पूछते रहे
इधर कोई ज़बाब नही.
रोज़ आता है मेरे दिल को
तसल्ली देने,
ख्याल-ए-यार को मेरा
खयाल कितना है.
कितना अजीब है,
अन्दाज तेरी मोहब्बत का.
रुला के कहते हाे
अपना ख्याल रखना.
तुम्हारे पैरो में
दर्द नहीं होता क्या?
सारा दिन मेरे ख्यालों में
घूमती रहती हो?
तेरे ख़्याल में जब
बे-ख़्याल होती हूँ,
ज़रा सी देर को ही सही,
बेमिसाल होती हूँ.
इसी ख्याल से गुज़री है
शाम-ए-दर्द अक्सर,
कि दर्द हद से जो गुज़रेगा
मुस्कुरा दूंगा.
किसी ने पूछा हमसे
कहाँ से लाते हो ये शायरी,
मैं मुस्करा के बोला
उसके ख्यालो मे डूब कर.
बैठे थे अपनी मस्ती में
के अचानक तड़प उठे,
आकर तेरे ख़्याल ने,
अच्छा नहीं किया.
यादें अपनी साथ ले जाओ
मुझ को क्यो तड़पाती हैं,
मेरे ख्याल मेरे नस नस मे
इस तरह कब्जा जमाती हैं.
शाम होती है
परिन्दे घर को आते हैं,
और हम तो दिवानें हैं
तेरे ख्यालों में खो जाते हैं.
ख्वाब ख्याल, मोहब्बत, हक़ीक़त,
गम और तन्हाई,
ज़रा सी उम्र मेरी
किस-किस के साथ गुज़र गयी.
एक शाम और ढली तेरे ख्याल लिए
अब हसरतों का कारवाँ रातभर चलेगा.
अब ना आना मेरे ख्यालो में तुम
तुमको अब मैं भुलाने जा रहा हूँ.
सो गई हैं शहर की सारी गलिया… अब
उसकी ख्यालों में जागने की बारी मेरी है