Love Shayari

watch_later Monday, 4 November 2019

सुनो सनम
दोबारा इश्क़ हुआ तो भी
तुमसे ही होगा
मैं खफ़ा हूँ, बेवफ़ा नहीं

कहीं और सिर टिका लूँ तो भी
आराम नहीं आता...
बेअक्ल दिल अच्छी तरह पहचानता है
कन्धा आपका

उस की हसरत को मेरे दिल में
लिखने वाले,
काश. उसको भी मेरी किस्मत में
लिखा होता

हक़ीम जी ज़रा मेरी आँखे देखना
आज-कल मेरे महबूब मेरे ख्वाबो में
नहीं आते

मौसम ए इश्क़ है ये जरा
खुश्क हो जायेगा
ना उलझिये हमसे जनाब वर्ना
इश्क हो जायेगा.

सुनो ना
आज दिल बेहद उदास हैं
पता हैं अब तेरा दिल
मेरे पास नहीं
किसी और के पास हैं

दिल को दिल ही तो
दुखाता है...
वो इक दिल जो इस दिल मे
रहता है.

चढ़ा है जब से तेरे इश्क का
स्वाद जंबा पे
अलफाज खुद ब खुद शायरी में
बदलने लगे

उफ़ हमारे सैंया जी में
विटामिन की थोड़ी कमी है

सुनो ना सैंया जी
तुम्हारा नाम टमाटर केचप
रख दु क्या
तुम्हारे बिना जिंदगी
रूखी रूखी लगती है

आजकल नहीं चलता प्यार
जन्म जन्मों का
लोग अपना मतलब निकाल कर
मुँह फेर लेते है

दो‬ पल ‪‎के‬ लिये ‪‎ही‬ सही
मेरी‬ तन्हाइयों ‪‎में‬
खो ‪‎जाओ‬
मैं भी ‪‎तुम्हारी और‪‎
तुम‬ भी मेरे
हो जाओ

फुर्सत मिले तो आना कभी
दिल की गलियों तक
हम धड़कनों में अपनी
तुम्हारा नाम सुनाएंगे

तेरा मन और मेरा मन, जिस दिन
सांझा हो जाता...
मेरी धड़कन हीर हो जाती , तेरा दिल
रांझा हो जाता .

दिल की हालत किसको
बताए
तुम भी पागल
हम भी पागल

तुम सोच हो मेरी
तुम्हें और कोई सोचे ही क्यूं

पीया तोसे नैना लागे रे
जाने अब कया होगा आगे रे

एक तेरी ख़ामोशी मार देती है मुझे,
बाकी सब अन्दाज़ अच्छे हैं
तेरी तस्वीर के

चढ़ा है जबसे तेरे इश्क का स्वाद
जंबा पे
अलफाज खुद ब खुद शायरी में
बदलने लगे

तुम्हारी कसम मेरे सैंया जी
अब हिम्मत नहीं हारेंगे,👍
मर जायेंगे मगर तेरे सिवा
किसी और को नहीं चाहेंगे !

सुनो डॉक्टर्स एक इश्क का इंजेक्शन
हमे भी लगा दो
उसके इश्क मे दर्द
बहुत होता है

ना जाने कैसा रिश्ता है
इस दिल का तुमसे,
धड़कना भूल सकता है पर
तेरा नाम नहीं

मैं ख्वाहिश बन जाऊँ, और तू
रूह की तलब,
बस यूँ ही जी लेंगे दोनों
मुहब्बत बनकर

तुम्हें चलना ही कितना है सनम,
बस मेरी धड़कनों से गुजर कर इस दिल में
उतरना है

कहते हैं सैंया जी
लगा लेना काजल अपनी आखो मे जरा
ख्बाब बनकर दाखिल होने का
इरादा है मेरा

काश मेरी उम्र भी लग जाती उसे
मेरा दिल लगा हुआ है जिससे

उस हकीम ने तो मेरे इलाज की
हद हीं पार कर दी
मेरे महबूब की तस्वीर ताब़ीज में
डाल कर दी

सुनो सैंया जी
में चाहे जितने भी आ जाये…
लेकिन अपनीका हीरो तो तू ही रहेगा
अब ऐसा भी क्या लिखूँ,
मैं तेरी याद में
कि तू ही दिखे मुझे हर अल्फाज में.

महफूज कर लो न हमें खुद में
ऐ सनम
बिन तेरे बेवजह बिखर रहे हैं हम

सोच समझकर आँखे मिलाना तुम.
ये प्यार बहुत प्यार से हो जाता है

तुम मत तलाशो यूँ आँखों में मेरी
तस्वीर को
हम तेरी आँखों में नहीं तुम्हारी साँसों में
रहते हैं.

सैंया जी अब तो दिल
धड़कता है
तो ,डर सा लगताहै,
कोई सुन ना ले,
मेरी धड़कन मे नाम आपका

तुम मेरी ज़िंदगी तुम ही मेरा
ख्वाब हो,
तुम ही सादगी तू ही मुस्कान हो
जी चाहता है बस यही कहती रहूँ,
तुम ही मेरी मन्नत तुम ही
मेरी जान हो.

पता नही कब तू
मेरी आँखों में देखेगा और पूछेगा
क्या सच में इतना प्यार करती हैं मुझसे पागल

जिंदगी का वो पल भी
कितना खास होगा
मै उसको याद करू और वो
मेरे पास होगा

कौन सी चाल चलू बता
जो तू मेरा हो जाये

मेरी धड़कनों मे तुम धड़कते हो
चाहो तो महसूस कर लो तुम

कमी नहीं थी मेरे अपनों की,
फिर क्यों वो अजनबी मेरे दिल में बस गया

दिल की धड़कनों में बसा कर
मुहब्बत का एहसास
इश्क़ की जंजीरों में बंध कर चलती है
हर साँस

फुर्सत मिले तो आना कभी
दिल की गलियों तक
हम धड़कनों में अपनी
तुम्हारा नाम सुनाएंगे

हर एक साँस मुझे खींचती है
उसकी तरफ़
ये कौन मेरे लिए बे-क़रार
रहता है.

तू अजनबी नही कोई खास है मेरा
दूर ही सही पर एहसास है मेरा.

प्यार तो वो है जो
हद में रहकर, बेहद हो जाए

वो पागल सच्चा वाला ईश्क
कर बैठा है मुझसे
कोई बताओ उसको बहुत बडी
सरफिरी हूँ में

नज़रों से ना देखो हमें
तुम में हम छुप जायेंगे
अपने दिल पर हाथ रखो तुम
हम वही तुम्हें मिल जायेंगे

वो चाहते है जी भर के
प्यार करना
हम सोचते है कि वो प्यार ही क्या
जिस में जी भर जाये.

अदब-ए-मोहब्बत से
हम नहीं वाक़िफ़.
आप रूबरू होते तो हम
गले लगा लेते .

दिल मिलने को तरसता है
जब जब याद आप आते है

प्यार करने का मौसम नहीं आता हैं,
पर जब तुम सामने आते हो, तो हर
मौसम मजेदार बन जाता हैं

कुछ दिनों से उनको भी हमारी
आदत हो गई हैं
शायद शरारत करते करते उन्हें भी
मोहब्बत हो गई हैं

मुझे तुमसे कितनी मोहब्बत है,
मालूम नहीं मगर
मुझे लोग आज भी तेरी क़सम
दे कर मना लेते है

सारा वक़्त औरो में बाट देते हो
हम कुछ नहीं लगते हैं क्या तुम्हारे

तुम भी आओ ना मेरे मुकद्दर में ऐसे,
जैसे दरियाओं में सैलाब आते हैं

यूं नज़र से बात की और
दिल चुरा गए
हम तो समझे थे बुत
आप तो धड़कन सुना गए

तुम मुझे अच्छे या बुरे नहीं लगते,
बस अपने लगते हो

कौन कहता है हमशक्ल नहीं होते,
देख तेरा दिल मेरे दिल से कितना मिलता है

इतना प्यार तो मैंने खुद से भी
नहीं किया,
जितना मुझे तुमसे हो गया



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