खुद पर यकीन रखना …..
ये आसमान का इशारा है …..
बस मिलने वाली है मंज़िल …..
कल का सूरज तुम्हारा है ….
परिंदों को मंज़िल मिलेगी यकीनन …..
ये फैले हुए उनके पर बोलते हैं…..
अक्सर वो लोग खामोश रहते हैं ….
ज़माने में जिनके हुनर बोलते हैं।
ना कोई संघर्ष, ना कोई तकलीफ…तो क्या ख़ाक मज़ा है जीने में
बड़े बड़े तूफ़ान थम जाते हैं, जब आग लगी हो सीने में …
जिनके इरादे मेहनत की स्याही से लिखे जाते हैं …
उनकी किस्मत में कभी खाली पन्ने नहीं होते हैं।
चलता रहूँगा पथ पर चलने में माहिर बन जाऊँगा …..
या तो मंज़िल मिल जायेगी या अच्छा मुसाफिर बन जाऊँगा।
उठो तो ऐसे उठो कि फक्र हो बुलंदी को …..
झुको तो ऐसे झुको की बंदगी भी नाज़ करे …..
जब कड़ी से कड़ी जोड़ते हैं तभी जंजीर बनती है …..
और जब मेहनत पे मेहनत होती है तभी तक़दीर बनती है।
खोल दो पंख मेरे अभी और उड़ान बाकी है …..
ज़मी नहीं है मंज़िल मेरी ….. अभी तो पूरा आसमान बाक़ी है,
लहरों की ख़ामोशी को समन्दर की बेबसी न समझो …..
जितनी गहराई अंदर है बाहर उतना तूफ़ान बाक़ी है.
क्यों घबराता है पगले दुःख होने से ….
जीवन तो प्रारम्भ ही हुआ है रोने से।
आखों में मंजिंल थी, गिरे और संभल गये ….
इन आँधियों में इतना दम नहीं था ….
चिराग हवाओं में भी जल गये ….
सीढियां उन्हें मुबारक हो जिन्हें सिर्फ छत तक जाना है ….
मेरी मंज़िल तो आसमान हैं और रास्ता मुझे खुद बनाना है।
मैं क्यों डरूं की ज़िन्दगी में क्या होगा ….
मैं क्यों सोचूं की बुरा क्या होगा ….
बढ़ता रहूँगा अपनी मंज़िल की ओर ….
मिल गई तो ठीक … वरना तजुर्वा होगा.
ख़्वाब टूटे हैं मगर हौंसले जिंदा हैं….
हमारे आगे मुश्किलें भी शर्मिंदा हैं.
या तो वक्त बदलता सीखो या फिर …. बदल जाओ वक्त के साथ….
मज़बूरियों को मत कोसो …. हर हाल में जीना सीखो.
ज़मीन पर बैठ क्यों आसमान देखता है ….
अपने पंखो को खोल …. ये ज़माना सिर्फ उड़ान देखता है.
सोचने से कहाँ मिलते हैं तमन्नाओं के शहर ….
चलना भी जरूरी है मंज़िल पाने के लिए ….
यूँहीं नहीं मिलती राही को मंज़िल ….
एक जूनून सा दिल में जगाना होता है,
पूछा चिड़िया से कैसे बनाया आशियाना, बोली
भरनी पड़ती है उड़ान बार बार ….
तिनका तिनका उठाना होता है।
मिल सके आसानी से उसकी ख्वाहिश किसे है ….
ज़िद तो उसकी है जो मुकद्दर में लिखा ही नहीं.
दुनिया का हर शोक पाला नहीं जाता ….
काँच के खिलौने को हवा में उछाला नहीं जाता ….
मेहनत करने से मुश्किलें हो जाती है आसान ….
क्योंकि हर काम तक़दीर पर टाला नहीं जाता.
जिनको कहना है कहने दो …
अपना क्या जाता है,
ये वक्त वक्त की बात है और …
वक्त सभी का आता है.
सामने हो मंजिल तो रास्ता ना मोड़ना …
जो भी मन में हो सपना वो मत तोड़ना …
हर कदम पर मिलेगी मुश्किलें आपको…
बस सितारे छूने के लिए जमीन मत छोड़ना.
हौसला रख वो मंजर भी आयेगा …
प्यासे के पास समन्दर भी आयेगा,
हार कर न बैठ ऐ मंजिल के मुसाफिर ….
मंजिल भी मिलेगी और मिलने का मज़ा भी आयेगा।