कभी मिली खुशियाँ कभी ग़मों का सैलाब मिला
रिश्तों की भरमार थी पर कोई अपना न दिखा,
जिंदगी में दौड़ लगी थी
आगे बढ़ने की हर तरफ
मिल रहा था वही सबको जो था वक्त ने लिखा।
कभी हाथों में उसका हाथ था
जिंदगी में उसका प्यारा सा साथ था,
आज बदल गए हैं दिन और बिखरे जज़्बात हैं
वो भी वक्त की बात थी ये भी वक्त की बात है।
बीते वक्त को याद कर यूँ अश्क न बहाया कर
अपने दिल पर लगे जख्म सबको न दिखाया कर
ये जो चल रहा है वक्त कुछ कर गुजर इसमें
पानी है मंजिल तो मेहनत से न घबराया कर।
वक्त ही कहाँ है किस्मत को अजमाने के लिए
वक्त से ही दौड़ लगा रहे हैं वक्त को पाने के लिए।
वक्त ने फंसाया है, लेकिन मैं परेशान नहीं हूँ
हालातों से हार जाऊं मैं वो इन्सान नहीं हूँ।
हार जाते हैं वो जो वक़्त के आगे
घुटने टेक दिया करते हैं,
जीत उन्हीं की होती है
जो बहानों के
लिबासों को उतार फेंक दिया करते हैं।
ये जरूरी नहीं कि वक्त के हाथों
हर दफा जफा हो,
कई मजबूरियां भी होती हैं किसी की
हर शख्स बेवफा नहीं होता।
चलो मान लिया कि तुम याद करते हो
मगर इस तरह क्यों अपना वक़्त बर्बाद करते हो।
कुछ लोग वक्त के नहीं अपनों के सताए होते हैं
अपने ही अहसास दिलाते हैं पराया होने का
पराये तो पराये होते हैं।
दौर भी बदलेगा और लब भी मुस्कुराएँगे
वक्त के फ़रिश्ते जब खुशियाँ लेकर आयेंगे।
दिल को उदास करने जब तन्हाई आती है
वक्त गुजर जाता है बस यादें साथ निभाती हैं।
कभी मचलता था ये दिल आज कल सुधर गया है,
जबसे जिंदगी का अच्छा वक्त गुजर गया है।
मोहब्बत के भी अपने दायरे हैं
हुजूर
वक्त अच्छा हो तो बेपनाह मिलती है
वर्ना ये तन्हाई में तनहा तड़पती है।
आगे वही बढ़ पायेगा
जो जिंदगी को अपने हिसाब से चलाएगा,
कौन रहेगा मैदान में कौन बाजी हारेगा
किस्मे है कितना दम अब ये वक्त बताएगा।
अब वक्त की कोई भी चाल न चल पाएगी,
मेरी जिद और मेरी कोशिशों से हर स्थिति बदल जायेगी।
आगे तुम्हीं को बढ़ना है नियति का यही इशारा है
ये हालात तुम्हारे हैं ये संघर्ष भी तुम्हारा है
तुम्हें खुद ही बदलना होगा सब क्योंकि
ये जिंदगी तुम्हारी है और ये वक्त भी तुम्हारा है।
सो रही है दुनिया
बस एक सपनों का तलबगार जाग रहा है,
दिन भी छोटे और रातें भी छोटी लगती हैं
वक्त जैसे जिंदगी से भी तेज भाग रहा है।
दुनिया समझती है बेकार जिसे
वो खोटा सिक्का भी एक दिन चल जायेगा,
मंजिल चुन कर बढ़ चुका हूँ मैं
हौसले बढ़ रहे हैं मेरे वक्त भी बदल जायेगा।