Desh Bhakti Shayari

watch_later Sunday, 3 November 2019
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मिटा दिया है वजूद उनका जो भी इनसे भिड़ा है,
देश की रक्षा का संकल्प लिए हर जवान सरहद पर खड़ा है।

यहाँ आरती है अज़ान है, हिन्दू हैं मुसलमान हैं,
है गर्व मुझे इस देश पर क्योंकि ये मेरा हिन्दुस्तान है।

आजाद, भगत सिंह जैसे, इस देश में जन्में वीर यहाँ,
कुर्बानी की इनकी गाथाएं गाता है ये सारा जहाँ।

भ्रष्टाचार, बेरोजगारी जैसे पापों का जब पतन होगा,
हो जाएगा खुशहाल ये जीवन खुशहाल ये मेरा वतन होगा।

हाथ जोड़कर नमन जो करते, मत समझो कमजोर हैं हम
उठाओ कथायें इतिहास की तो छाये हुए हर ओर हैं हम।

सच्चाई की राह पर चलते, नहीं मन में कोई बुरी भावना
उन्नत हो ये देश हमारा, अपनी तो बस यही कामना।

हर रोज नया दिन, हर रोज नया पर्व है,
विविधताओं से भरे इस देश पर मुझे गर्व है।

उत्तर में है खड़ा हिमालय, दक्षिण में सागर मचल रहा,
पूरब से सूरज निकला देखो, पश्चिम प्रगति में बदल रहा।

न तीर से न तलवार से हम समझाएं पहले प्यार से हम,
जो टकराता है फिर भी हमसे, मिटा दें उसको पहले वार से हम।

सारा संसार ये जानता है हमारी जो भी पहचान है,
संस्कृत से संस्कृति हमारी हिंदी से हिन्दुस्तान है।

गद्दार थे वो लोग जिन्होंने सरहद पर रेखा खींची है,
यूँ ही नहीं मिली आज़ादी हमको, इसे शहीदों ने खून से सींची है।

जन्म लिया जिस देश में मैंने. ह्रदय से उसको नमन हो,
ख्वाहिश बस इतनी है मुझको, मरते वक़्त तिरंगा मेरा कफ़न हो।

पूरा सम्मान वो पाएगा, मेहमान जो बन कर आएगा,
जो आँख उठी दुश्मन की तो, मिटटी में मिलाया जाएगा।

ऐसा देश नहीं है कोई जिसने यह रीत अपनाई है,
देश को कहते माता और लोगों को कहते भाई हैं।

ऐसा सुकून कहीं नहीं मिलता चाहे घूमो सारा जहान,
दिल में एक नाम जो धड़के, वो है अपना हिन्दुस्तान।

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बहोत अच्छा लिखा भाई

delete 8 May 2020 at 23:50



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